Wednesday, November 14, 2012

एहसास ...अनुभूति!



गत कुछ दिनों में मेरे साथ कुछ ऐसी घटनाएं घटी जिन्होंने मुझे जीने की एक नयी दिशा दी।
अब भाई, हूँ तो इंसान ही, इसीलिए जानती हूँ की इस नयी दिशा में यूँ अकस्मात् ही चल देना नामुकिन है, पर प्रयास तो कर ही सकती हूँ।

वाद विवाद प्रतियोगिता "सही सलामत" समापन को प्राप्त करवा दी गयी .
जी।  सही सलामत अर्थात  बिना किसी झगडे फसाद के . आपने यदि हमें  "तरंग" के दिनों में देखो हो तो शायद समझेंगे की मैं ऐसा क्यूँ कह रही हूँ । खैर, हमारी अध्यक्ष एवं संपूर्ण वाद विवाद समिति को बधाई!
 यह तो हुई एक अच्छी बात ।

दूसरी मनोहारी सूचना मेरे हृदयगत परिवर्तन के विषय में है .
आदरणीय आंग सां सू ची, बरमा के एनएलडी की सदस्य हमारे महाविद्यालय में पधारेंगी और हम सब ही उनके आगमन से अत्यधिक प्रसन्न व उत्साहित हैं . मैं भी उस उनके आगमन पर होने वाले भव्य आयोजन का एक हिस्सा हूँ - सामूहिक गान की एक गायिका के रूप में!

जैसा कि  मैंने अपने एक और ब्लौग में लिखा है, मुझे गायन समूह में काफी पिछला स्थल मिला था और मैं थोड़ी सी दु:खी थी। मेरे मन में मात्र यह विचार था कि  इतने पीछे से गायेंगे तो ख़ाक सुनाई देगा ...उससे भी ज्यादा, चिंता यह थी की देखेगा कोई कैसे, की हम भी हैं गुट में! पर आज, मैंने स्वयं के अलावा उन अन्य लोगों को भी सभागार में देखा जो बिना किसी स्वार्थ के लगे हुए थे आयोजन को सफल बनाने के प्रयासों में । उन के प्रयास व उत्साह को देख के लगा की मानो दुनिया के सबसे बड़े बेवकूफ ठेहरे  हम, जो चकाचौंध की दौड़ में भूल ही गए कि  आयोजन मेरा नहीं पूरे महाविद्यालय का है - प्रत्येक व्यक्ति का उत्साह आवश्यक है - मनो या न मानो!

अत: मैंने भी यह तय किया है कि  सीखना तो पड़ेगा कुछ इन जाबांज लोगों से---नि:स्वार्थ भाव से सामूहिक हित सोचना कोई इनसे सीखे! और मैं भी पीछे खड़े होकर इस आयोजन का भाग ही बन रही हूँ-----इस में कोई बुराई  नहीं , कतई  नहीं!

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